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VYAVASTHIT
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अश्वगंधा एक महत्वपूर्ण औषधीय फसल है। वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग से मिट्टी की संरचना सुधरती है, जड़ों की वृद्धि होती है और जड़ों की औषधीय गुणवत्ता बढ़ती है।
| चरण | समय | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| बुवाई | जून–जुलाई | प्रमाणित बीज का उपयोग; मिट्टी में वर्मी कम्पोस्ट मिलाएं |
| शाकीय वृद्धि | 30–60 दिन | निंदाई और टॉप ड्रेसिंग |
| फूल आना | 60–90 दिन | मिट्टी की नमी बनाए रखें |
| कटाई | 150–180 दिन | पत्ते सूखने पर जड़ें निकालें |
प्र: क्या वर्मी कम्पोस्ट रसायनों की जगह ले सकता है?
उ: हाँ, यह जड़ों की गुणवत्ता और उपज बढ़ाता है।
प्र: कितनी बार वर्मी कम्पोस्ट डालना चाहिए?
उ: कम से कम दो बार – बुवाई पर और वृद्धि चरण में।
प्र: क्या औषधीय गुण बढ़ते हैं?
उ: हाँ, यह अल्कलॉइड मात्रा और जड़ की गुणवत्ता बढ़ाता है।
अपनी अश्वगंधा खेती के लिए पोषक वर्मी कम्पोस्ट प्राप्त करें। उपज और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाएँ।
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