🌱 वर्मी कम्पोस्ट के साथ आलू की खेती

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परिचय

आलू एक प्रमुख कंद फसल है। वर्मी कम्पोस्ट मिट्टी की वायु संचार क्षमता सुधारता है, कंद का आकार बढ़ाता है और उपज को बेहतर करता है।

Potato Farming

आलू में वर्मी कम्पोस्ट के लाभ

वर्मी कम्पोस्ट कब और कैसे डालें

  1. रोपाई के समय: प्रति एकड़ 1–1.5 टन वर्मी कम्पोस्ट डालें।
  2. वृद्धि अवस्था (30–40 दिन): प्रति एकड़ 400–500 किलो वर्मी कम्पोस्ट।
  3. कंद निर्माण: नमी बनाए रखने के लिए वर्मी कम्पोस्ट मल्च करें।

आलू की खेती का समय-चक्र

अवस्थासमयमुख्य क्रियाएँ
रोपाईअक्टूबर–नवंबरस्वस्थ कंद लगाएँ; मिट्टी में वर्मी कम्पोस्ट मिलाएँ
वृद्धि20–40 दिननिराई-गुड़ाई और वर्मी कम्पोस्ट डालें
कंद विकास40–80 दिननमी बनाए रखें; वर्मी कम्पोस्ट और जीवामृत डालें
कटाई100–120 दिनजब पत्ते सूख जाएँ तब कटाई करें

FAQ – आलू में वर्मी कम्पोस्ट

प्र: क्या वर्मी कम्पोस्ट आलू के रोग कम करता है?
उ: हाँ, यह मिट्टी जनित रोगों को घटाता है।

प्र: कितनी बार वर्मी कम्पोस्ट डालें?
उ: कम से कम दो बार – रोपाई और वृद्धि अवस्था में।

प्र: क्या कंद की गुणवत्ता बढ़ती है?
उ: हाँ, कंद बड़े, स्वादिष्ट और लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं।

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