सोयाबीन भारत की सबसे महत्वपूर्ण तिलहन फसलों में से एक है। सोयाबीन की खेती में वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है, उत्पादन में सुधार करता है और फसल को कीटों व रोगों से लड़ने की क्षमता देता है।
| चरण | समय | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| बुवाई | जून मध्य से जुलाई प्रारंभ | प्रमाणित बीज का उपयोग करें, जैव उर्वरक से बीज उपचार करें |
| वनस्पतिक वृद्धि | 20–35 दिन बाद | निराई-गुड़ाई और वर्मी कम्पोस्ट की टॉप ड्रेसिंग |
| फूल व फली निर्माण | 35–70 दिन | मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखें |
| कटाई | 90–100 दिन | जब 80% फलियाँ भूरे रंग की हो जाएँ तो कटाई करें |
प्र: क्या वर्मी कम्पोस्ट सोयाबीन में सभी रासायनिक उर्वरकों को बदल सकता है?
उ: हाँ, यदि अच्छे कृषि प्रबंधन के साथ प्रयोग किया जाए तो वर्मी कम्पोस्ट पूरी तरह रासायनिक उर्वरकों को बदल सकता है।
प्र: वर्मी कम्पोस्ट कितनी बार डालना चाहिए?
उ: कम से कम दो बार – बुवाई से पहले और फूल आने के समय।
प्र: क्या यह मिट्टी की सेहत लंबे समय तक सुधारता है?
उ: बिल्कुल। वर्मी कम्पोस्ट मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ और सूक्ष्मजीवों की विविधता बढ़ाता है।
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