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VYAVASTHIT
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भारत में आम को "फलों का राजा" कहा जाता है। आम की खेती में वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग मिट्टी की उर्वरता, पेड़ की सेहत और फलों की गुणवत्ता को बढ़ाता है, जिससे बड़े, मीठे और अधिक टिकाऊ आम मिलते हैं।
| चरण | समय | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| रोपण | जुलाई–अगस्त (मानसून) | ग्राफ्टेड पौधे लगाएँ; गड्ढों में वर्मी कम्पोस्ट मिलाएँ |
| वनस्पतिक वृद्धि | पहले 3 वर्ष | सिंचाई, मल्चिंग और साल में दो बार वर्मी कम्पोस्ट डालें |
| फूल आना | जनवरी–फरवरी | फूल और फल सेट के लिए वर्मी कम्पोस्ट डालें |
| कटाई | अप्रैल–जून | फलों को पकने पर तोड़ें; पेड़ पर ज्यादा देर न छोड़ें |
प्र: क्या वर्मी कम्पोस्ट से रासायनिक उर्वरक की जरूरत नहीं रहती?
उ: हाँ, वर्मी कम्पोस्ट मिट्टी को पर्याप्त पोषण देता है और रासायनिक उर्वरक की आवश्यकता नहीं रहती।
प्र: वर्मी कम्पोस्ट कितनी बार डालना चाहिए?
उ: कम से कम साल में दो बार – वर्षा से पहले और फल तुड़ाई के बाद।
प्र: क्या इससे फलों की गुणवत्ता बढ़ती है?
उ: बिल्कुल। फल ज्यादा मीठे, बड़े और टिकाऊ हो जाते हैं।
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